डीएमएफटी शेल में कमिशन वसुली के कारण नहीं हो रहा राशि विमुक्त, पूर्ण की गई योजनाओं में राशि निर्गत नहीं किए जाने का मामला पहूंच सकता है, कल्याण मंत्री तक

अवशेष राशि की विमुक्ति में तीन महिना लगना जिला प्रशासन की कार्य शैली पर खड़ा हो रहा सवाल


चाईबासा/संतोष वर्मा : डीएमएफटी फंड की योजना में अवशेष राशि की विमुक्ति में भारी विलम्ब होने से संवेदकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।अवशेष राशि की विमुक्ति में तीन महिना लगना जिला प्रशासन की कार्य शैली की उजागर करती है,साथ ही डीएमएफटी शेल के सहायकों की लापरवाही और उदासीनता की भी उजागर करता है। उदहारण के तौर पर जगन्नाथपुर और नोआमुंडी ब्लॉक की दो योजना में अवशेष राशि की विमुक्ति का प्रस्ताव डीएमएफटी शेल में धूल फांक रही है, जबकि बीडीओ के द्वारा जांच रिपोर्ट जिला की भेजा गया है। ऐसा लगता है की आर्थिक स्वार्थ सिद्ध के लिए राशि की विमुक्ति नहीं हो रहा है। जलमिनार की योजना ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल से पूर्ण की गई है, वहीं पीसीसी सड़क का कार्य लघु सिंचाई प्रमंडल से पूरा किया गया है। 

ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल से राजकीय उच्च विद्यालय में जलमीनार और शौचालय का निर्माण कराया गया है, जिसमें संवेदक को अब तक कोई भी भुगतान एजेंसी से नहीं किया गया है। एजेंसी के द्वारा जिला से राशि की मांग की गई है, परन्तु अब तक एजेंसी को राशि नहीं मिला है। वहीं लघु सिंचाई प्रमंडल से कोटगढ सिमान से मार्शल तीरिया के घर तक पीसीसी सड़क निर्माण कार्य में अवशेष राशि की मांग किए जाने के बाद भी राशि प्राप्त नहीं हुआ है।

जबकी पूर्ण की गई योजनाओं में राशि निर्गत नहीं किए जाने का मामला कल्याण मंत्री तक पहुंच सकता है। 

सूत्रों की माने तो डीएमएफटी शेल में कमिशन वसुली के कारण नहीं हो रहा राशि विमुक्त। राशि विमुक्ति पर कितना समय लगता है,इसका कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।

राशी विमुक्त करने की कोई समस्या नहीः कार्यपालक अभियंता 

ग्रामीण विकास विभाग विशेष प्रमंडल चाईबासा के कार्यपालक अभियंता जितेंद्र पासवान से पुछे जाने पर बताया गया की हमारे विभाग में राशी विमुक्त करने की कोई समस्या नहीं है।यदी कोई फाईल रूकी होगी तो कागजी प्रर्किया के चलते रूकी होगी जिसका जांच कर निदान कर दिया जायेगा

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