विशाल खलको को नहीं रोक पाए संतोष कुमार सिंह
ग्रामीण कार्य विभाग के चाईबासा प्रमंडल के माफिया सहायक संतोष कुमार सिंह ने एक दबंग संवेदक के सहारे विशाल खलको को प्रभारी नहीं बनाने के लिए पूरी मेहनत करते नज़र आए, संतोष कुमार सिंह अजय तिर्की के लिए लाखों रुपए खर्च करने के लिए तैयार थे। सूत्र
चाईबासा प्रमंडल में संतोष कुमार सिंह सहायक की तूती बोलती है। कार्यपालक अभियंता से ज्यादा अहमियत है संतोष कुमार सिंह का। सूत्र
संवेदक अपने भुगतान के लिए संतोष सिंह के आगे नतमस्तक रहते हैं। सूत्र
संतोष कुमार सिंह के इशारे पर चलती है चाईबासा प्रमंडल कार्यालय का कार्य प्रणाली। सुत्र
संतोष वर्मा
Chaibasaःसेवा निवृत्त तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राधेश्याम मांझी के कार्यकाल में ग्रामीण कार्य प्रमंडल चाईबासा के दिग्गज माफिया सहायक संतोष सिंह अपने अथक प्रयासों के बावजूद विशाल खलको को चाईबासा में नहीं आने देने के लिए किए, लेकिन सफलता हासिल नहीं मिली। गौरतलब है कि संतोष सिंह विशाल खलको जैसे तेज तर्रार स्मार्ट अभियंता को पसंद नहीं करते हैं, क्यूंकि उनकी मनमानी कार्यालय में अब नहीं चलने वाली है। संवेदकों से गलत ढंग से कमिशन वसूली में संतोष सिंह महारत हासिल किए हुए हैं। संवेदक सूत्रों के अनुसार विपत्र जांच करने में संवेदकों को ब्लैक मेलिंग करना उनकी आदत में शुमार है। आवंटन के नाम पर भी मनमानी वसूली करने से बाज नहीं आते हैं। चाईबासा प्रमंडल में रहते अवैध कमिशन वसूली से बिहार राज्य में संपत्ति अर्जित करने का मामला भी किसी संगठन ने दर्ज कराया गया है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इतना जरूर चर्चा है कि औरंगाबाद और पटना में जमीन, मकान लिया है, जिसकी निगरानी जांच की आंच संतोष सिंह के परिवार में के साथ साथ ससुराल तक पहुंच सकती है। अब देखना है कि संतोष सिंह अपने जाल में विशाल खलको को किस टैक्टिस से अपने कब्जे में करते हैं, और फिर से एक बार पुनः अपना राजपाट चला पाते हैं। सूत्रों के अनुसार निकट भविष्य में शराब घोटाला और जमीनी घोटाला में फंसे विनय चौबे और विनय सिंह की तरह संतोष सिंह की यथा स्थिति उत्पन हो सकती है।
