सरायकेला/दीपक कुमार दारोघा: आदिवासी हो समाज के वरिष्ठ एवं युवाओं के संयुक्त तत्वाधान में सरायकेला में आयोजित नेशनल हो युवा मीट में शामिल होने देश के विभिन्न क्षेत्र से आए युवाओं ने सम्मेलन के बाद खरसांवा शहीद स्थल भ्रमण कर ऐतिहासिक महत्व से हुए परिचित। इस दौरान श्री वीर सिंह सिजुई, श्री साधु हो, श्री राहुल पूर्ति ने युवाओं को खरसावां गोली कांड 1 जनवरी 1948 की ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी।
इससे पहले सरायकेला युवा मीट में हुई सेमिनार में युवाओं ने उच्च शिक्षा, पलायन, धर्म, अंधविश्वास, स्वरोजगार, युवाओं की प्रतिभा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समस्याओं पर चर्चा की। और "संकल्प-55" की टीम बनाई। जिसके तहत अगले एक वर्षों में 55 कार्य करेंगे। और एन एच वाई एम 2025 में होने वाले कार्यक्रम में सोशल इंपेक्ट की प्रस्तुति करेंगे। कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी समस्याओं और समाधानों को साझा किया।
टीम बिल्डिंग के तहत हुई कार्यक्रम में युवाओं ने अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाया। इसमें खेल, नाटक और संगीत के माध्यम से एकता और सहयोग का संदेश दिया गया। विभिन्न शहर से आए युवाओं ने कहा कि हम इस महोत्सव को आगे भी आयोजित करते रहेंगे, ताकि हो आदिवासी युवाओं को अपनी क्षमताओं को विकसित करने और समाज में योगदान करने का अवसर मिले।
कार्यक्रम में गोल्ड मेडलिस्ट तीरंदाजों को मंच में किया गया सम्मानित
16-20 दिसम्बर 2024 तक जमशेदपुर में हुई राष्ट्रीय तीरंदाज प्रतियोगिता में चाईबासा के रीता सवैयाँ गोल्ड मेडल, और चाँदमनी कुंकल को ब्रोंज मेडल मिलने पर उसके कोच श्री महर्षी महेंद्र सिंकु को भी पदमश्री डा. जानुम सिंह सोय एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री सावन सोय द्धारा संयुक्त रूप से सम्मानित किया गया।
आयोजन समिति के अध्यक्ष सावन सोय ने कहा कि इन तीरंदाजों ने अपनी अद्वितीय प्रतिभा और समर्पण के साथ देश को गौरवान्वित किया है। हमें उनकी उपलब्धियों पर गर्व है और हम उनके भविष्य के प्रयासों के लिए उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।
इस अवसर पर, मुख्य अतिथि पदमश्री डॉ.जानुम सिंह सोय ने भी उनकी प्रशंसा की और कहा कि "यह हमारे देश के लिए एक गर्व का पल है। हमें अपने तीरंदाजों और उनके कोच पर गर्व है और हम उनकी उपलब्धियों को सलाम करते हैं।
इस अवसर पर सरायकेला के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्री समीर सवैयाँ ने हो समाज के युवाओं को नशा एवं गलत संगती से बचने और कठिन परिश्रम कर लक्ष्य प्राप्त करने का संदेश दिए।श्री साधुचरण देवगम ने युवाओं को प्रेम रस की कविता सुनाकर सबको लोटपोट करने के साथ हमेशा समाज के लिए एक पैर पर खड़े रहने की बात कही।
कार्यक्रम में आदिवासी फैशन शो भी देखने को मिला। हो आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और उनकी पारंपरिक परिधानों को प्रदर्शित करने के लिए फैशन शो का आयोजन किया गया। जिसमें कुल 50 युवा एवं युवतियों ने ट्रेडिशनल म्युजिक के धुन पर कैट वाक किया।
इस कार्यक्रम में सरायकेला विद्युत विभाग के एसडीओ श्री संजीव सवैयां, श्री दीपक तुबिड, श्री कृष्णा दिग्गी, श्रीमती बाहलेन चाम्पिया,ओड़िसा से श्री गिरिश चंद्र, दिल्ली से श्री बलबद्र बिरूवा (प्रोफेसर जे एन यू) आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री साधु हो, श्री बिरसिंह सिजुई, डॉ बबलु सुंडी, गौरा मुंडा एवं मनोज सोय द्वारा किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बबलु सोय, कैलाश देवगम, संदीप तापे, सलेन बिरूवा, अरबिंद, सूरज पुर्ती, सुशील सवैयाँ, राहुल पुर्ती, ललिता सामड, पंकज बांकिरा, रबिंद्र गिलुवा, संजय बोयपाई, झारखंड बोदरा, विष्णु बानरा, श्री संजीव बिरउली, गणेश गागराई, सुरसिंह तापेए, जोबना बोदरा, मंजु तियु चातर, मालती कुमारी, शीतल जारिका, रानी सोय, आनंद हेम्ब्रम, सुरेश हेम्ब्रम मोहन गुंदुआ, देवचरण बानरा, विभन सोय, लालु जामुदा, विष्णु बानरा, सुभाष सिंकु, एवं अन्य आयोज समिति के सदस्यों का अहम योगदान रहा।