सारंडा की जनता के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह,आदिवासियों को उजाड़ने की स्थिति – गीता कोड़ा

सारंडा  की जनता के अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह,आदिवासियों को उजाड़ने की स्थिति  – गीता कोड़ा

santosh verma

Chaibasa ःभारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व सांसद श्रीमती गीता कोड़ा ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि —“सारंडा  और सासंगदाबुरु को रिज़र्व फॉरेस्ट और वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी बनाने की आड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा–कांग्रेस गठबंधन सरकार यहां के मूल निवासियों, आदिवासियों और वन ग्रामों में वर्षों से रह रहे परिवारों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। सरकार को यह बताना चाहिए कि जब माइंस बंद हो जाएंगे तो यहां के लोगों की रोज़ी-रोटी का क्या होगा? उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य व्यवस्था और जीवन-यापन पर इसका सीधा असर पड़ेगा ,दूसरी बार सत्ता में आई गठबंधन सरकार का इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है,

उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार इतने संवेदनशील मुद्दे को कोर्ट में पक्ष रखने में विफल रही है, अब जब कोर्ट का आदेश आ गया है ऐसे में यहां पिढियो से रह रहे लोगों का आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो चुका है?

श्रीमती कोड़ा ने कहा कि कोर्ट में बेहतर ढंग से पक्ष न रखकर अब अपनी चेहरा बचाने के लिए झारखंड सरकार को अचानक याद आया कि स्थानीय लोगों की स्थिति का अध्ययन किया जाए। तभी हड़बड़ी में मंत्रिमंडल की समिति गठित कर सारंडा  भेजने की घोषणा कर दी गई। सवाल यह है कि इतने कम समय में क्या मंत्रियों की यह समिति कोई ठोस निर्णय लेने में सक्षम होगी या सिर्फ़ खानापूर्ति करके लौट आएगी?जल, जंगल और ज़मीन” की बात करने वाली सरकार किस तरह आदिवासियों और स्थानीय लोगों के अधिकार के प्रति बिल्कुल भी सजग नहीं है

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