जगन्नाथपुरः साननंदा में मागे पर्व की धूम, विधायक सोनाराम सिंकु परिवार सहित हुए शामिल

जगन्नाथपुरः साननंदा में मागे पर्व की धूम, विधायक सोनाराम सिंकु परिवार सहित हुए शामिल



मांदर और नगाढ़ा बजा कर लोगों का किया अभिवादन,वहीं विधायक श्री सिंकु ने ग्रामीणों को मागे पर्व की शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की




संतोष वर्मा

Chaibasaः जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले ग्राम साननंदा में शुक्रवार को पारंपरिक आदिवासी पर्व मागे पर्व बड़े धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह उप मुख्य सचेतक (सत्तारूढ़ दल) सोनाराम सिंकु अपने परिवार के साथ शामिल हुए, जिससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।विधायक सोनाराम सिंकु अपनी धर्मपत्नी श्रीमती तुलसी सिंकु, पुत्र जगप्रीत सिंकु तथा पुत्री ईशा सिंकु और निशा सिंकु के साथ मागे पर्व के अवसर पर गांव स्थित जहेरा स्थल पहुंचे। आदिवासी हो समाज का सबसे बड़ा पर्व है। गऊमाराह से प्रारंभ होकर ओतेएली, गोरीपर्व, मरांगपर्व, बासीपार्व एवं हारमागेया पर्व मनाया जाता है। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुख्य देऊरी सारीम लागुरी एवं सहायक देऊरी मनोज बोबोंगा के द्वारा मरांगपर्व के दिन गांव की सुख-समृद्धि, शांति एवं मंगल कामना के लिए विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। जिसमें हजारों की संख्या में ग्रामीण श्रद्धा के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।



पूजा-अर्चना के बाद गांव में पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। मंदार की गूंजती धुन पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत किया। इस दौरान युवा, महिलाएं, बुजुर्ग एवं बच्चे सभी उत्साह के साथ शामिल हुए और पूरे गांव में पर्व जैसा माहौल बना रहा।



विधायक के आगमन से ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान विधायक श्री सिंकु ने ग्रामीणों को मागे पर्व की शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र के विकास और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

ग्राम साननंदा में इस वर्ष मागे पर्व हर्षोल्लास, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया गया। पूरे गांव में खुशी का माहौल रहा और लोगों ने इस पर्व को यादगार रूप से मनाया। मौके पर मथुरा लागुरी, अजीत गागराई, रमेश हेंब्रम, रासिका लागुरी, सुशील लागुरी, रंजीत गागराई, रोशन पान, बुधन गागराई, मंजीत लागुरी(ग्रामीण मुंडा), रामकृष्ण लागुरी, जनसिंह देवगम, अमित लागुरी, लक्ष्मी नारायण गागराई, लक्ष्मी नारायण लागुरी, इंद्रजीत गोप, सुभाष लागुरी, रामसिंह कायम, रघुनाथ कायम, लक्ष्मण गागराई, राम गागराई नजीर लागुरी, मनबोध लोहार, विनीत लागुरी, पांडु देवगम, नजीर गागराई , तुरी लागुरी आदि गांव के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

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