चक्रधरपुर अस्पताल की घटना पर पूर्व सांसद गीता कोड़ा का बयानः कहा कि यह घटना झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण
संतोष वर्मा
Chaibasaःकराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई गांव निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम की पत्नी रीता तिरिया ने प्रसव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में भर्ती होकर एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद नवजात की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के कारण बच्चे की जान नहीं बच सकी। दुखद यह रहा कि अस्पताल प्रबंधन ने मृत नवजात को घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक उपलब्ध नहीं कराई। मजबूर होकर पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम को अपने ही बच्चे के शव को एक कार्डबोर्ड के डिब्बे में रखकर घर ले जाना पड़ा। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।
इस घटना पर पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना झारखंड की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता का गंभीर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी अमानवीय घटना सामने आई है। इससे पहले चाईबासा सदर अस्पताल से भी एक मजबूर पिता को अपने बच्चे के शव को थैले में लेकर जाते देखा गया था। उस समय भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भारी आलोचना हुई थी, लेकिन किसी ने उससे कोई सबक नहीं लिया। आज फिर वैसी ही घटना चक्रधरपुर में घटित होना पूरे स्वास्थ्य तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
पूर्व सांसद ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में सांसद, विधायक और मंत्री सभी सत्ताधारी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस से हैं, इसके बावजूद जिले के अस्पतालों की ऐसी बदहाल स्थिति बनी हुई है। अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, बेड की कमी के कारण कई मरीजों का इलाज जमीन पर किया जाता है और गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड तथा अन्य जांच के लिए घंटों लंबी कतार में खड़ा रहना पड़ता है। कई बार डॉक्टर भी समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते, जिससे मरीजों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
गीता कोड़ा ने यह भी कहा कि चाईबासा और चक्रधरपुर आसपास के क्षेत्रों के लोगों को आज भी खून की आवश्यकता होने पर जमशेदपुर जाना पड़ता है, क्योंकि यहां का ब्लड बैंक अब तक चालू नहीं किया गया है। यह सरकार और स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राज्य में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने जैसी शर्मनाक घटना भी सामने आ चुकी है, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया।
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि आदिवासी और गरीब परिवारों के साथ सरकारी अस्पतालों में उपेक्षा और भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग जनता की पीड़ा से पूरी तरह बेखबर हैं और झामुमो सरकार प्रशासनिक कुंभकरणी नींद में सोई हुई है।
उन्होंने राज्य सरकार, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि अस्पतालों की व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी गरीब और आदिवासी परिवार को इस तरह की पीड़ा और अपमान का सामना न करना पड़े।
