आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत जिला प्रक्रिया प्रयोगशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

 आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत जिला प्रक्रिया प्रयोगशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ



santosh verma ः आदि कर्मयोगी अभियान (AKA) के तहत जिला प्रक्रिया प्रयोगशाला प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ आज दिनांक 30 अगस्त 2025 को वनपाल प्रशिक्षण केंद्र चाईबासा, में किया गया। यह कार्यक्रम 01 सितंबर 2025 तक आयोजित होगा। इससे पूर्व विगत दिवस को समाहरणालय स्थित सभागार में District-1 Orientation Workshop का आयोजन जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। बैठक के अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण समुदायों की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करना है। यह योजना समस्या केंद्रित न होकर समाधान केंद्रित होगी। उन्होंने कहा कि जिले के जनजातीय समुदायों के समुचित विकास के लिए इस प्रकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। उपायुक्त ने यह भी उल्लेख किया कि ग्राम स्तर पर आदि कर्मयोगी केंद्र की स्थापना की जाएगी, जिसमें नोडल पदाधिकारी का नाम और संपर्क विवरण अंकित रहेगा ताकि आमजन अपनी समस्याओं के समाधान हेतु सीधे संपर्क स्थापित कर सकें।



PD, ITDA ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य है, कि प्रत्येक गाँव सशक्त, आत्मनिर्भर और समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़े। इसी क्रम में आदि कर्मयोगी अभियान के तीन चरणों आदि सहयोगी, आदि साथी और कर्मयोगी की भूमिकाओं को भी स्पष्ट किया गया। आदि सहयोगी के रूप में शिक्षक, डॉक्टर और विभिन्न पेशेवर समुदाय को मार्गदर्शन देंगे, जबकि आदि साथी के रूप में स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल, जनजातीय बुजुर्ग, युवा और स्थानीय जनप्रतिनिधि योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग और समर्थन प्रदान करेंगे।

प्रशिक्षण के प्रथम दिन विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। रांची में आयोजित राज्य स्तरीय प्रक्रिया प्रयोगशाला से प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए वक्ताओं ने नीचे से ऊपर दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता बताई और आदर्श गाँव बनाने की परिकल्पना पर बल दिया। आँगन निर्माण सत्र के दौरान योजना और क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने, भूमि और संसाधनों के बेहतर उपयोग, वंचित तथा अति दरिद्र परिवारों के समावेश और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने संचालन हेतु मॉनिटर का चयन, समय पर उपस्थिति तथा मोबाइल के सीमित प्रयोग जैसे नियम भी निर्धारित किए।

संचालित फिशबोल गतिविधि में प्रतिभागियों ने विद्यालय, महाविद्यालय और करियर से जुड़े अनुभव साझा किए, जिनमें शिक्षक, मित्र, साथी, शैक्षणिक चुनौतियाँ और करियर प्रेरणाएँ शामिल थीं। इन अनुभवों से सहानुभूति और आपसी जुड़ाव में वृद्धि हुई तथा टीम का मनोबल मजबूत हुआ।इस अभ्यास का उद्देश्य गौरवपूर्ण उपलब्धियों को मॉडल के रूप में अपनाना, कमजोरियों की पहचान कर सुधार करना और जवाबदेही व निरंतर सुधार की संस्कृति को बढ़ावा देना रहा।

दिन भर चले इन सत्रों और चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि अभियान की सफलता सामूहिक प्रयास, विभागीय अभिसरण, सामाजिक समावेशन और जवाबदेही पर आधारित होगी। प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि सेवा भवनों को सक्रिय बनाकर ग्राम स्तर पर समग्र विकास की दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करेंगे।

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