आश्चर्य की बात है कि गुवा, डांगवापोसी, नोवामुंडी और जामदा में रेल्वे डिपार्टमेंट भी रेलवे साइडिंग से सफाई के नाम पर हजारों टन लोह अयस्क को बिचौलियों के हाथों उठाए जाने की भी जांच हो सकती है। सूत्र
चालू खदान की भी सर्वे कर सकती है आयोग। सुत्र
शाह कमिशन की तर्ज पर पुनः नई कमिशन गठित कर लौह अयस्क की अवैध खनन का आकलन और राजस्व की हानि पर केंद्र सरकार को रिपोर्ट करेगी। सुत्र
लौह अयस्क की अवैध खनन मामला में केंद्र सरकार आयोग गठित करने पर विचार कर रही है। सुत्र
रांची डेस्कः सरकार में शाह कमिशन का गठन अवैध खनन की जांच करने के लिए किया गया था। शाह कमिशन के रिपोर्ट पर आज तक पूर्ण रूप से केंद्र सरकार खदान मालिकों से पेनाल्टी एवं जुर्माना नहीं वसूली कर पाई है। गौर तलब है कि ऐसे बहुत खदान हैं जो खनन विभाग एवं बिचौलियों के साथ मिलकर अपने लीज पट्टा से अधिक क्षेत्र पर खनन कर रहे हैं। आज भी ऐसे मामले हैं, जिसपर खनन विभाग चुप्पी साधने का काम कर रही है। अवैध खनन सिर्फ बंद पड़े खदान या रैयत के खदानों से ही अवैध खनन नहीं हो रही है, बल्कि चालू खदान में भी अपने लीज पट्टा से अधिक क्षेत्र पर खनन करने की चर्चा है। इसी आधार पर वैध और अवैध दोनों स्तर पर जांच के लिए केंद्र सरकार आयोग गठित करने पर विचार कर रही है। सूत्रों की माने तो मनोहरपुर और नोवामुंडी प्रखण्ड के साथ साथ उड़ीसा के जोड़ा क्षेत्र की भी खदानों में अवैध खनन पर केंद्र सरकार की नजर है। भाजपा के बड़े नेता के हवाले से यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि अवैध खनन मामला में सात ट्रांसपोर्टर, तरह ट्रेडिंग कंपनी और अवैध लौह अयस्क की खरीद करने वाली बीस से अधिक प्लांट पर गोपनीय जांच चल रही है। नेताओं और बिचौलियों के साथ सरकारी तंत्र के लोगों की लिस्ट भी बनाई जा चुकी है। इस पूरे घटना से पर्दा उठना तय माना जा रहा है। दिल्ली में बैठे उद्योग घराने के सूत्रों के अनुसार जिस तरह खनन प्रभावित क्षेत्र से उग्रवाद का खात्मा किया जा रहा है, उसी तरह से अवैध खनन का अन्त जल्द होने वाला है। सूत्रों के अनुसार अवैध खनन करने वाले तथाकथित लोगों की चल अचल संपत्ति पर भी केंद्र सरकार की जांच एजेंसी नजर रख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के द्वारा पकड़े गए अवैध खनन मामला पर केंद्र सरकार गंभीरता से लिया है। राज्य सरकार के द्वारा केस दर्ज नहीं किया जाना केंद्र सरकार के होश उड़ाने जैसा है। आज केंद्र सरकार जो भी अवैध खनन पर कार्रवाई करने जा रही है, उसमें कोड़ा जी की मुख्य भूमिका होगी। अरबों रुपए का सरकारी राजस्व की हानि और फर्जी जीएसटी बिल, चलान पर ट्रांसपोर्टरों, ट्रेडर्स के द्वारा हड़पने से राज्य की आर्थिक व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है। जहां राज्य सरकार रेवेन्यू जनरेट करने में पीछे नज़र आ रही है वहीं राज्य सरकार के ही सरकारी तंत्र अपने काले कारनामे से राज्य को आर्थिक बदहाली पर पहुंचा दिया है। जिला प्रशासन के अधीन खनन विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की भूमिका संदेहास्पद मानी जा रही है। अवैध खनन करने के लिए डीएफओ का ट्रान्सफर पर भी केंद्र सरकार जांच कर सकती है। सूत्रों के अनुसार माफिया गिरोह नेताओं के संरक्षण में डीएफओ को हटा कर अवैध खनन करने का काम किया गया है।