ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रिय पात्र मुख्य अभियंता सरवन कुमार पर निकट भविष्य में संकट का बादल मंडराने वाला है?

 ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रिय पात्र मुख्य अभियंता सरवन कुमार पर निकट भविष्य में संकट का बादल मंडराने वाला है?



जल्द ही ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता अवधेश कुमार अपने आने वाले संकट को भांपते हुए पैतृक विभाग जाने की तैयारी में जुटे हैं. सूत्र

ग्रामीण विकास विशेष के मुख्य अभियंता अवधेश कुमार

 मंत्र दीपिका पांडेय सिंह के प्रिय पात्र मुख्य अभियंता सरवन कुमार

जांच होने पर मुख्य अभियंता के साथ साथ मंत्री तक जांच का आंच पहुंच सकता है. सूत्र


ग्रामीण कार्य विभाग की भ्रस्टाचार पूरे राज्य एवं हेमन्त सरकार को बदनामी के कगार पर पहुंचा दिया है. सूत्र

ग्रामीण कार्य विभाग भ्रस्टाचार का अड्डा बन गया है. सूत्र

संतोष वर्मा

Chaibasaःग्रामीण कार्य विभाग के सबसे चर्चित मुख्य अभियंता अवधेश कुमार ,सरवन कुमार एवं ग्रामीण कार्य विभाग के अभियन्ता प्रमुख के द्वारा बिना कारण एवं विभागीय आदेश के बिना टेन्डर प्रकिया को रोक दिए जाने का मामला पर केंद्रीय जांच एजेंसि पैनी नजर रख रहे हैं, साथ ही ईमानदार छवि वाले विभागीय सचिव मनोज कुमार इस मामला मे टेन्डर निष्पादन समय पर नहीं किए जाने से गंभीर है.विदित हो कि विधानसभा में विभागीय मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने एक सदस्य के प्रश्न पर जवाब दिया है कि sop बनाकर समय पर निविदा निष्पादित किया जाएगा. अधिकांश निविदा कमिशन वसूली की प्रत्याशा में बिड validity समाप्त हो गई है. पुनः Bid validity को बढ़ाने के लिए सभी संवेदक से आग्रह किया जा रहा है, इस सम्बन्ध में संवेदक letter के माध्यम से Bid validity बढ़ाने के लिए लिख रहे हैं. यह प्रस्थिति क्यूँ है, टेन्डर प्रक्रिया को लटकाने वाले अभियंताओं पर दंडात्मक कारवाई क्यूँ नहीं हो रही है. समय पर निविदा के निष्पादन होने से पुल एवं सड़क का निर्माण होता, छेत्र का विकास होता, स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सम्पन्न का माहौल बनता, लोगों के बीच खुशी देखने को मिलता, लेकिन अभियंताओं की भ्रस्टाचार नीति एवं कार्यशैली से राज्य का बंटाधार होता दिख रहा है. जिस तरह पूर्व सरकार में जिस तरह ग्रामीण कार्य विभाग में भ्रस्टाचार हुआ है, दो बार ED की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है, आज भी वही हालत ग्रामीण कार्य विभाग में है. बिना कमिशन वसूली के एक भी tender का loay नहीं दिया जाता है. टेन्डर manege मामला में मन्त्रालय की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है. मुख्य अभियंताओं की भूमिका की जांच होना तय माना जा रहा है.सूत्रों के अनुसार ED की रडार पर ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री, अधिकारी एवं अभियन्ता हैं. ED के द्वारा पूर्व मंत्री एवं पूर्व मुख्य अभियंता केस में supplementary चार्जशीट में जिस तरह अभियंताओं पर कानूनी शिकंजा कसने की बात कही गई है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि निकट समय में वर्तमान में कार्यरत अभियन्ता अवधेश कुमार, सरवन कुमार और सुरेंद्र कुमार साथ ही राम निवास प्रसाद पर बड़ी कार्रवाई होने से इंकार नहीं किया जा सकता है, क्यूंकि इन्होंने अपने कार्यकाल में संवेदक चयन में भारी अनियमितता बरतने की शिकायत है, यूँ कहा जा रहा है कि फेल को पास और पास को फेल किए जाने की अनगिनत निविदा है. इस सम्बन्ध में सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत सूचना माँगा जाता है, लेकिन सूचना नहीं दी गई है, उक्त अभियन्ताओं पर जनहित याचिका भी दायर होने की सूचना है.सेवा निवृत्त पूर्व अभियन्ता प्रमुख जय प्रकाश सिंह भी इस भ्रस्टाचार के जनक माने जाते हैं, इनके खिलाफ भी जनहित याचिका दायर की सूचना है,सूत्रों के अनुसार जिसे प्रार्थी ED को सौंपे जाने की कोशिश कर रहे हैं.


 *यह भी जाने पूर्व के मंत्रियों के कार्यकाल में हो चुका है बड़े कारनामें* 


*ग्रामीण विकास विभाग में 3048 करोड़ के टेंडर में 90 करोड़ कमीशन की हुई वसूली* 


ग्रामीण विकास विभाग के चार मुख्य अभियंताओं के कार्यकाल में 3048 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ. इसमें 3% की दर से बतौर कमीशन 90 करोड़ रुपये की वसूली हुई. विभाग में हर स्तर के अधिकारियों के लिए कमीशन की रकम में हिस्सेदारी तय है. कमीशन की रकम का बंटवारा भी इसी रूप में किया गया. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी के मामले में दायर पांचवे आरोप पत्र (Prosecution Complain) में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है.


ईडी ने पीएमएलए के विशेष कोर्ट में ग्रामीण विकास विभाग में कमीशनखोरी और मनी लाउंड्रिंग के मामले में 5वां आरोप पत्र दायर किया है. इसमें कुल 14 इंजीनियरों को अभियुक्त बनाया गया है. इससे पहले तक कुल 22 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया जा चुका है. 

5वां आरोप पत्र  दायर होने के बाद ग्रमीण विकास विभाग में कमीशनखोरी के मामले में आरोपितों की कुल संख्या 36 हो गई है. 5वें आरोप पत्र में मुख्य अभियंता से लेकर सहायक अभियंता स्तर के अधिकारी शामिल है. ईडी द्वारा दायर आरोप पत्र में कहा गया कि ग्रामीण विभाग में टेडर मूल्य का 3% प्रतिशत कमीशन वसूला जाता था.कमीशन की इस रकम के बंटवारे के लिए हर स्तर पर हिस्सेदारी निर्धारित है. कमीशन की रकम में मंत्री की हिस्सेदारी 1.35%, 0.75% विभागीय सचिव, 0.50% मुख्य अभियंता और 0.40% अन्य अधिकारियों की हिस्सेदारी तय थी. मंत्री का हिस्सा उनके आप्त सचिव संजीव लाल के माध्य से कलेक्ट किया जाता था.

ईडी द्वारा दायर 5वें आरोप पत्र में कहा गया है कि चार मुख्य अभियंताओँ के कार्यकाल में कुल 3048 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया. इसमें से मुख्य अभियंता बिरेंद्र राम के कार्यकाल में 2014-15 के बीच 492 करोड़ और 2021-23 के बीच 650 करोड़ का टेंडर हुआ.मुख्य अभियंता राजीव लोचन के जुलाई 2023 से अक्तूबर 2023 तक की अवधि में 650 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ. मुख्य अभियंता सिंगारी टूटी के जनवरी 2023 से नवंबर 2023 तक की अवधि में 600 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ. इसी तरह मुख्य अभियंता प्रमोद कुमार के दिंसबर 2023 से मई 2024 तक के कार्यकाल के दौरान 350 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ. इसमें से कमीशन के तौर पर कुल 90 करोड़ रुपये की वसूली हुई. इसके बाद विभाग में स्थापित कमीशन के बंटवारे के नियम से इसका बंटवारा हुआ. कमीशन की रकम से खरीदी गयी 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.


   *अभियुक्तों की सूची* 


1- बिरेंद्र राम, तत्कालानीय मुख्य अभियंता

2- आलोक रंजन, बिरेंद्र राम का रिश्तेदार

3- राज कुमारी, बिरेंद्र राम की पत्नी

4- गेंदा राम, बीरेंद्र राम के पिता

5- मुकेश मित्तल, चार्टर्ड आकाउंटेट

6- तारा चंद, फर्जी खाता खोलने वाला

7- नीरज मित्तल, CA का सहयोगी

8- राम प्रकाश भाटिया, हवाला कोरोबारी

9- हरिश यादव, हवाला कारोबारी

10- हृदया नंद तिवारी

11-  आलमगीर आलम, तत्कालीन मंत्री

12- संजीव लाल, मंत्री के आप्त सचिव

13- जहांगीर आलम, आप्त सचिव का करीबी

14- सुरेश प्रसाद वर्मा, जूनियर इंजीनियर

15- अतिकुल रहमान, ठेकेदार

16-  राजेश कुमार, ठेकेदार

17- राजेश कंस्ट्रक्शन

18- परमानंद सिंह बिल्डर्स

19- राधा मोहन साहू, ठेकेदार

20- अंकित साहू, ठेकेदार

21- राजीव कुमार सिंह, ठेकेदार

22- रीता लाल, संजीव लाल की पत्नी

23- सिंगारी टूटी, मुख्य अभियंता

24- राजीव लोचन, मुख्य अभियंता

25- सुरेंद्र  कुमार, मुख्य अभियंता

26- उमेश कुमार, अधीक्षण अभियंता

27- संतोष कुमार, कार्यपालक अभियंता

28- अजय कुमार, कार्यपालक अभियंता

29- अजय तिरकी, कार्यपालक 

30- राज कुमार टोप्पो

31- अशोक कुमार गुप्ता, सहायक अभियंता 

32- राम पुकार राम, इंजीनियर

33- प्रमोद कुमार, मुख्य अभियंता

34- सिद्धांत कुमार, कार्यपालक अभियंता

35- अनिल कुमार, कार्यपालक अभियंता

36- रमेश ओझा, कार्यपालक अभियंता


 *कितने की संपत्ति जब्त* 


नाम              संपत्ति

बीरेंद्र राम    39.28 करोड़

मुकेश मित्तल 35.77 लाख

संजीव लाल व रीता लाल 4.42 करोड़

जहांगीर आलम  32.20 करोड़

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